राज्य में द्वितीय सदन की उपयोगिता


पक्ष में तर्क

  • विधानसभा कि शीघ्रगामी इच्छा को रोकती है ताकि विधानसभा स्वेच्छाचारी न हो सके और शक्ति संतुलन बनाए रखा जा सके
  • विधानपरिषद् बिल की कमियों को दूर करती है
  • इसमें विज्ञान साहित्य कला समाज सेवा और सहकारिता कार्यों से जुड़े लोगों को भी प्रतिनिधित्व दिया जाता है जिससे राज्यों को उनके ज्ञान का लाभ मिलता है
  • विधानपरिषद् बिल के पास होने में आवश्यक देरी करवाती है इस देरी का लाभ यह होता है कि जनता उसके गुण दोषों पर विचार कर सकती है
  • विधानपरिषद् से हानि का कोई भय नहीं है क्योंकि इसे महत्वपूर्ण शक्तियां प्राप्त नहीं है यदि निम्न सदन बिल को पास कराने करने पर तुला हुआ हो तो ऊपरी सदन कोई विशेष रुकावट नहीं डाल सकता तथा उसके कारण एक साधारण बिल 4 माह तक और धन विधेयक 14 दिन तक रोके जा सकते हैं

विपक्ष में तर्क

  • भारत के अनेक राज्य निर्धन है तथा विधान परिषद के खर्चों को सहन नहीं कर सकते विधान परिषद के आर्थिक भोज को वहां की जनता पर कर लगाकर पूरा किया जाता है जिसका कोई विशेष महत्व नहीं है जबकि बिल निम्न सदन में से संपूर्ण जांच पड़ताल के बाद आता है
  • किसी मंत्री के विरुद्ध यह अविश्वास प्रस्ताव पास नहीं कर सकता मंत्री भी अधिकतर निम्न सदन के लिए चुने जाते हैं
  • इसका चुनाव का ढंग अप्रजातंत्रीय है
  • विधानपरिषद् एक निर्भर तथा व्यर्थ का सदन है इसके अधिकार भी बहुत कम है या किसी तरह भी निम्न सदन पर नियंत्रण नहीं रख सकता |
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