समन्वित पीड़क प्रबंधन (Integrated trouble management)

  • इस अवधारणा के प्रथम प्रतिपादक गियर वंध क्लार्क (1961) थे यह योजना पीड़क नियंत्रण के उपयोग में लाई जा रही अनेक विधियों का ऐसा सहयोग है, जो आर्थिक पारिस्थितिक और सामाजिक मूल्यों और परिणामों को ध्यान में रखते हुए नाशक कीट की ऐसी व्यवस्था अथवा प्रबंध करेगा, जिससे नाशक कीट को उस स्तर तक रखा जा सके जहां इससे आर्थिक क्षति नहीं पहुंचेगी साथ ही वह पर्यावरण में बना रहेगा और उस पर आश्रित जीवों में व्यवधान नहीं आएगा |
  • भारत में प्रथम सुरक्षा के लिए समन्वित पीड़क प्रबंधन कार्यक्रम का शुभारंभ सातवीं पंचवर्षीय योजना में किया गया था किंतु इतने दिनों के बाद भी देश में समन्वित कीट प्रबंधन को अभी भली-भांति पहचान बनानी है |
  • इस प्रकार संबंधित प्रबंधन का लक्ष्य ऐसी विधियां विकसित करना और इन्हें बनाए रखना है जिससे पीड़क फसल को व्यापक रूप से खेती ना पहुंचा सके |
  • समन्वित पीड़क प्रबंधन हेतु फसलों के कई घटक या उपकरण सफलतापूर्वक प्रयोग किए गए हैं इनमें से कुछ इस प्रकार है-
  1. पीड़क प्रतिरोधी प्रजातियों का प्रयोग करना |
  2. खेती की पद्धति का सामूहिक उपयोग जैसे अगेती या पछेती बुवाई, जो कीटों के प्रमुख आक्रमण काल में फसल को सुरक्षित कर सके |
  3. ग्रीष्मकालीन जुताई |
  4. फेरोमोन्स फंदों का उपयोग |
  5. फसल पर लगने वाले कीटों के परजीवियों, परभक्षियों और रोगजनकों का विकास |
  6. संगरोधन उपाय |
  7. मानवीय श्रम से कीटों का संग्रह तथा विनाश |
  8. कीटनाशकों कीट आकर्षकों निष्कीटकों तथा का प्रयोग करना |
  9. वृद्धि नियंत्रक, नर और बंध्याकरण पद्धति और उन्मूलन कार्यक्रमों का युक्ति संगत प्रयोग करना |
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