राज्यपाल की विधायी शक्तियां (Governor’s Legislative Powers)

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राज्यपाल की विधायी शक्तियां

राज्यपाल विधानमंडल का सदस्य नहीं होता, परंतु राष्ट्रपति की तरह वह भी विधानमंडल का अंग होता है, राज्यपाल का विधान मंडल की शक्तियों से यह संबंध है और उसे कई प्रकार की वैधानिक शक्तियां प्राप्त हैं जिनमें मुख्य निम्न है –

  1. वह राज्य विधानसभा के सत्र को आहूत या सत्रावसान या विघटित कर सकता है, अधिवेशन बुलाने की राज्यपाल की शक्ति पर एक संवैधानिक प्रतिबंध है और वह यह है कि पहले अधिवेशन के अंतिम तिथि तथा अगले अधिवेशन की पहली तिथि के बीच 6 महीने महीनों से अधिक का समय व्यतीत ना हुआ हो |
  2. वह विधानमंडल के दोनों सदनों में भाषण दे सकता है तथा उनको संदेश भेज सकता है |
  3. प्रत्येक वर्ष विधानमंडल का अधिवेशन राज्यपाल के भाषण से आरंभ होता है, जिसमें राज्य की नीति का वर्णन होता है |
  4. राज्य विधानमंडल द्वारा पास हुआ बिल तब तक कानून नहीं बन सकता जब तक राज्यपाल अपनी स्वीकृति ना दे दे | धन बिलों को राज्यपाल स्वीकृति देने से इनकार नहीं कर सकता, परंतु साधारण बिलों को पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकता है |यदि विधान मंडल साधारण बिल को दोबारा पास कर दे तो राज्यपाल को अपनी स्वीकृति देनी ही पड़ती है राज्यपाल कुछ बिलों को राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए आरक्षित रख सकता है |
  5. राज्यपाल राज्य विधानमंडल के उच्च सदन (विधान परिषद) के ⅙  सदस्यों को मनोनीत कर सकता है जो राज्य के कला, साहित्य, विज्ञान, समाज सेवा तथा सहकारिता से जुड़े हो |
  6. राज्यपाल को अध्यादेश जारी करने का भी अधिकार प्राप्त है जब विधानमंडल का अधिवेशन न चल रहा हो और कोई असाधारण परिस्थिति उत्पन्न हो गई हो जिसको पूरा करने के लिए कोई कानून ना हो तब राज्यपाल अध्यादेश जारी कर सकता है |
  7. अध्यादेश को उसी प्रकार लागू किया जा सकता है जिस प्रकार विधानमंडल के बनाए हुए कानून को परंतु यह अध्यादेश विधान मंडल की बैठक आरंभ होने पर 6 सप्ताह के पश्चात लागू नहीं रह सकता राज्यपाल को अध्यादेश जारी करने की पूर्ण स्वतंत्रता है और इसकी इस शक्ति का प्रयोग को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है |
  8. राज्य लोक सेवा आयोग और महालेखा परीक्षक अपनी वार्षिक रिपोर्ट राज्यपाल के पास भेजते हैं और राज्यपाल इन रिपोर्टों को विधानमंडल के सामने रखता है |
  9. राज्यपाल विधान परिषद के सभापति तथा उपसभापति के पद रिक्त होने पर किसी भी सदस्य को विधान परिषद की अध्यक्षता करने को कह सकता है |
  10. यदि विधान मंडल के किसी सदस्य की अयोग्यता संबंधी कोई विवाद हो तो उसका निर्णय राज्यपाल करता है और उसका निर्णय अंतिम होता है परंतु निर्णय लेने से पूर्व राज्यपाल के लिए चुनाव आयोग का परामर्श लेना आवश्यक है |