स्थानीय शासन व उसकी विशेषताएँ, पंचायती राज

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स्थानीय शासन (Local government)


पंचायती राज (Panchayati Raj)

  • लोकतांत्रिक देशों की सबसे बड़ी चुनौती रही है कि कैसे प्रत्येक निर्णय में जनता की सहभागिता को बढ़ाया जाए जिससे वे अपने विकास का रास्ता खुद तय कर सके इसी उद्देश्य को बढ़ावा देने के लिए सत्ता के विकेंद्रीकरण की बात कही जाती है |
  • गांव में व्याप्त समस्याओं को केंद्रीय स्तर पर बैठकर हल नहीं किया जा सकता है इन समस्याओं को विकेंद्रीयकरण के माध्यम से ही हल किया जा सकता है जिसका सबसे अच्छा माध्यम ग्राम सभाएं हो सकती हैं |

स्थानीय स्वशासन की विशेषताएं (Features of local self-government)

  1. जनता अपनी समस्याओं को स्वयं हल कर सकती है |
  2. कार्यों के बंटवारे से केंद्र व राज्य स्तर की सरकारों का बोझ कम होगा |
  3. राजनीतिक चेतना का विकास होता है |
  4. सत्ता के विकेंद्रीकरण से जन कल्याणकारी कार्यों को आसानी से पूरा किया जा सकता है |

स्थानीय स्वशासन के जनक (Father of local self-government)

  • भारत में स्थानीय स्वशासन का जनक लॉर्ड रिपन 1880 से 1884 ईसवी को माना जाता है इन्होंने 1882 ईस्वी को एक प्रस्ताव पारित कर के स्थानीय शासन के लिए निम्न प्रावधान किए |
  1. स्थानीय बोर्ड को कार्य करने तथा आय के साधन दिए गए
  2. जिला बोर्डों का गठन किया गया |
  3. सरकारी हस्तक्षेप की अनुमति कार्यों की समीक्षा करने तक ही सीमित कर दी गई |
  • बाद में भारत शासन अधिनियम 1919 के द्वारा स्थानीय स्वशासन को एक हस्तांतरित विषय में परिवर्तित कर दिया गया और इन संस्थाओं को अपने विकास कार्य करने की अनुमति दे दी गई तथा भारत शासन अधिनियम 1935 के द्वारा उन संस्थाओं को और सुदृढ़ बनाने का प्रयास किया गया |

भारत में स्थानीय स्वशासन की पृष्ठभूमि (Background of local self-government in India) 

  • गांधीजी ग्राम स्वराज्य के पक्षधर थे अतः संविधान सभा ने राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के तहत अनुच्छेद 40 में ग्राम पंचायतों का प्रावधान करके राज्यों को इनका गठन करने की शक्ति प्रदान कर दी |
  • अतः स्वतंत्रा की प्राप्ति के बाद पंचायती राज व्यवस्था के लिए प्रयास आरंभ हुएउसके लिए केंद्र में पंचायती राज्य एवं सामुदायिक विकास मंत्रालय का गठन किया गया तथा एस के डे को इस विभाग का मंत्री बनाया गया |
  • जिसके तहत पहली बार 2 अक्टूबर 1952 को सामुदायिक विकास कार्यक्रम विकास में जनता की सहभागिता के उद्देश्य को लेकरप्रारंभ किया गया लेकिन यह अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में असफल रहा अतः 1 साल बाद 2 अक्टूबर 1953 को राष्ट्रीय प्रसार सेवा कार्यक्रम प्रारंभ किया गया जो सफल ना हो सका |

विभिन्न राज्यों में पंचायती स्तर (Panchayat level in different states)

  • एक स्तरीय (केवल ग्राम पंचायतें) – केरल, त्रिपुरा, सिक्किम, मणिपुर, जम्मू-कश्मीर |
  • द्विस्तरीय (ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति) – असम, कर्नाटक, उड़ीसा, हरियाणा, दिल्ली, पुदुच्चेरी |
  • त्रिस्तरीय (ग्राम पंचायत पंचायत समिति जिला परिषद) – उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, गोवा |
  • चार स्तरीय (ग्राम पंचायत अंचल पंचायत आंचलिक परिषद जिला परिषद) पश्चिम बंगाल |
  • जनजातीय परिषद – मेघालय, नागालैंड, मिजोरम |

विभिन्न राज्यों में पंचायत समिति के नाम (Name of Panchayat Samiti in different states)

नाम राज्य
पंचायत समिति बिहार पंजाब राजस्थान महाराष्ट्र
मंडल पंचायत आंध्र प्रदेश
पंचायत यूनियन तमिलनाडु
आंचलिक परिषद पश्चिम बंगाल
आंचलिक पंचायत असम
जनपद पंचायत मध्य प्रदेश
तालुका विकास बोर्ड कर्नाटक
क्षेत्रमिति उत्तर प्रदेश
अंचल समिति अरुणाचल प्रदेश