वन और वन्य प्राणियों को संरक्षित करने की क्या आवश्यकता है ?

मानव के लिए वन प्राकृतिक का ऐसा वरदान है जिस पर उसका अस्तित्व, उन्नति एवं समृद्धि निर्भर होती है। अगर वन न हो तो आप लोग समझ ही सकते है क्या होगा। वनों में जीवन व्यतीत करने वाले वन्य जीवों से भी मानव जाति का युगो से विशेष संबंध रहा है। क्योंकि अपने विकास की प्रारंभिक अवस्था में स्वयं मानव भी 1 वन्य जीव ही था। मानव की लगभग सारी आवश्यकताएं वनों से पूरी हो जाती थी। जैसे:- पहनने के लिए पेड़ के पत्ते खाने के लिए फल आदि।

विकसित वृद्धि का स्वामी होने के कारण मानव ने प्राकृतिक पर्यावरण के साथ सामंजस्य करने के बजाय पर्यावरण को अपने अनुकूल ढालना शुरू कर दिया। खेती का विकास उद्योगों का विकास करके वह अपने को प्रकृति का स्वामी बन गया और पर्यावरण में अप्रत्याशित परिवर्तन करके मानव ने अपनी जनसंख्या इतनी बढ़ा ली और यही नहीं अपनी आवश्यकताएं इतनी बढ़ा ली कि प्राकृतिक संसाधनों से इनकी पूर्ति मुश्किल हो गई और प्राकृतिक संसाधन को मानव इस प्रकार इस्तेमाल करने लगा जैसे कि कोई व्यक्ति आय से ज्यादा खर्च करके जमा पूंजी को ही खाने लगे। परिणाम हमारे सामने हैं वन व वन्य प्राणियों के रूप में हमारी संपदा तेजी से घट रही है और विश्व स्तर पर इनके संरक्षण की आवश्यकता महसूस की जा रही है। यह आवश्यकता दो प्रकार की हैं:-

1. वनों का संरक्षण क्यों?
2. वन्य प्राणियों का संरक्षण क्यों?

1. वनों का संरक्षण क्यों:- वनों के संरक्षण के बिना मानव का अस्तित्व खतरे में है वनों का संरक्षण निम्नलिखित कारणों के संदर्भ में विशेष महत्व रखता है।

1. प्रदूषण को कम करने के लिए:- प्रदूषण की रोकथाम के लिए वनों का बढ़ाना जरूरी है। पेड़ पौधे प्रदूषण को दो प्रकार से कम करते हैं।
एक तो यह SO2 की कुछ मात्रा बिना हानिकारक प्रभाव के ही उपयोग कर लेते है। वातावरण के उठते हुए धुंए व गैसों के साथ मिश्रित कणों को वायु में घुलने से रोकते हैं। इस प्रकार से प्राकृतिक छलनी का कार्य करती है।

2. जल चक्र स्थाई रखने के लिए:- सभी जानते हैं कि प्रकृति के जल चक्र में जमीन में पानी के रिसाव में वनों का अभूतपूर्व योगदान होता है। जमीन के पानी का वाष्पन कराकर बादल बनाने में भी वनों का काफी योगदान है। 

3. भूमि अपरदन रोकने के लिए:- जंगलों के काटने से हमारे देश में ही लगभग 7 करोड़ टन मिट्टी का क्षरण हो रहा है। जल ग्रहण क्षेत्र में वन विहीन ढलानों पर वर्षा की तेज बौछारों से तेजी से बहता जल भूमि कटाव की प्रक्रिया को बढ़ाता है। इससे भूस्खलन भूमि अपरदन मैदानी क्षेत्रों में नदियों का तल बढ़ने से बाढ़ बढ़ती जा रही हैं। 

4. वन्य जीव संरक्षण के लिए:- वन्यजीवों का अस्तित्व वनों पर ही टिका है। वनों के उजड़ने से अनेक प्राणियों के प्राकृतिक आवास उजड़ते जा रहे हैं। और वे भी लुप्त होते जा रहे है। 

5. मानव की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए:- मनुष्य की विभिन्न आवश्यकताएं तभी पूरी होंगी जब वन होंगे। वनों का सफाया जब हम कर देंगे तो हमारी भावी पीढ़ी की आवश्यकताएं कहां से पूरी होंगी?
शायद सांस लेने के लिए उन्हें ऑक्सीजन भी उपलब्ध नहीं हो।

2. वन्य प्राणियों का संरक्षण क्यों:- वन्य प्राणी हमारे लिए बहुत ही उपयोगी हैं। और वन परितंत्र के महत्वपूर्ण घटक हैं। अनेक कारणों से इनका संरक्षण बहुत आवश्यक है।

1. वन्य प्राणियों से हमें अनेक उपयोगी वस्तुएं प्राप्त होती हैं उनकी खाल दाँत सींग आदि से कई प्रकार के परिधान व आकर्षक वस्तुएं बनाई जाती हैं। उनके अंगों से अनेक प्रकार की औषधियां प्राप्त की जाती हैं। वन्य प्राणियों के करण पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है।

2. अनेक प्रकार के प्रयोग वैज्ञानिक वन्य जीवों पर ही करते हैं। उनसे प्राप्त परिणाम मानव कल्याण के लिए उत्तम होती है।

3. वन्य प्राणियों से प्राकृतिक संतुलन बना रहता है। वन्य प्राणी अपने क्रियाकलापों से प्रकृति के कार्यों में मदद करते हैं जैसे मधुमक्खियां व पशु पक्षी परागण व बीजों के फैलाव में मदद करते हैं। पशुओं के पंजों से जमीन खुद ही रहती हैं। केंचुए तो जमीन को पलटने में बहुत मदद करते हैं। मोर खेतों में घुसकर सांपों की आबादी पर नियंत्रण रखते हैं। जंगल में जितने अधिक वन्य प्राणी वनों में होंगे उतना ही वह समृद्ध होगा।

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