क्या होता है बायोस्फीयर रिज़र्व,संरचना तथा मानदंड?

बायोस्फीयर रिज़र्व

  • बायोस्फीयर अथवा जैवमंडल रिज़र्व में वन्यजीवों एवं प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा, रखरखाव, प्रबंधन या पुनर्स्थापन किया जाता है।
  • बायोस्फीयर रिज़र्व , संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्कोद्वारा प्राकृतिक और सांस्कृतिक परिदृश्यों के सांकेतिक भागों के लिये दिया गया एक अंतर्राष्ट्रीय पदनाम है।
  • यूनेस्को के अनुसार, “बायोस्फीयर रिजर्व स्थलीय और तटीय पारिस्थितिक तंत्र के क्षेत्र हैं, जो अपने सतत उपयोग के साथ जैव विविधता के संरक्षण के समाधान को बढ़ावा देते हैं।
  • बायोस्फीयर रिजर्व, प्राकृतिक और सांस्कृतिक परिदृश्य का प्रतिनिधित्व भी करता है।
  • यूनेस्को ने ‘बायोस्फीयर रिजर्व’ की शुरुआत प्राकृतिक क्षेत्रें में विकास और संरक्षण के बीच संघर्ष को कम करने के उद्येश्य से की है।
  • बायोस्फीयर रिजर्व लोगों और प्रकृति दोनों के लिये विशेष वातावरण हैं जिसमे मनुष्य एवं प्रकृति एकदूसरे की ज़रूरतों का सम्मान करते हुए रह सकते हैं।

संरचना

  • बायोस्फीयर रिजर्व को तीन भागों में विभाजित किया जाता है-
  • कोर क्षेत्र
  • बफर क्षेत्र
  • संक्रमण क्षेत्र

कोर क्षेत्र (Core Zone),

  • यह बायोस्फीयर रिज़र्व का सबसे संरक्षित क्षेत्र है।
  • इसमें स्थानिक पौधे और जानवर हो सकते हैं।
  • यह काफी संवेदनशील होता है, यहाँ मानवीय गतिविधियों की अनुमति नहीं है।

बफर क्षेत्र (Buffer Zone)

  • बफर क्षेत्र, कोर क्षेत्र और संक्रमण क्षेत्र के बीच का क्षेत्र है।
  • इस क्षेत्र का प्रयोग ऐसे कार्यों के लिये किया जाता है जो पूर्णतया नियंत्रित व गैर-विध्वंशक हों।
  • यहाँ वैज्ञानिक अनुसंधान की अनुमति दी जाती है।

संक्रमण क्षेत्र (Transition Zone)

  • यह बायोस्फीयर रिज़र्व का सबसे बाहरी हिस्सा होता है।
  • यह सहयोग का क्षेत्र है इस क्षेत्र के अंतर्गत मानव बस्तियां, फसल भूमि, प्रबंधित जंगल, मनोरंजन का क्षेत्र और अन्य आर्थिक उपयोग वाले क्षेत्र शामिल हैं।

मानदंड

  • प्रकृति संरक्षण के दृष्टिकोण से संरक्षित और न्यूनतम अशांत क्षेत्र होना चाहिए।
  • प्रबंधन प्राधिकरण को स्थानीय समुदायों की भागीदारी / सहयोग सुनिश्चित करना चाहिए ताकि जैव विविधता के संरक्षण और सामाजिक-आर्थिक विकास को आपस में जोड़ते समय प्रबंधन और संघर्ष को रोकने के लिये उनके ज्ञान और अनुभव का लाभ उठाया जा सके।
  • संपूर्ण क्षेत्र एक जैव-भौगोलिक इकाई की तरह होना चाहिए और इतना बड़ा होना चाहिए जो पारिस्थितिकी तंत्र के सभी पौष्टिकता स्तरों का प्रतिनिधित्व कर रहे जीवों की आबादी को संभाल सकें।
  • वह क्षेत्र जिनमे पारंपरिक आदिवासी या ग्रामीण स्तरीय जीवनयापन के तरीको को संरक्षित रखने की क्षमता हो ताकी पर्यावरण का सामंजस्यपूर्ण उपयोग किया जा सके।

भारत में बायोस्फीयर रिज़र्व

  • भारत में 18 बायोस्फीयर रिज़र्व हैं-
  • नंदा देवी, उत्तराखंड
  • कोल्ड डेज़र्ट, हिमाचल प्रदेश
  • खंगचेंदजोंगा, सिक्किम
  • देहांग-देबांग, अरुणाचल प्रदेश
  • मानस, असम
  • डिब्रू-सैखोवा, असम
  • पन्ना, मध्य प्रदेश
  • पचमढ़ी, मध्य प्रदेश
  • अचनकमार-अमरकंटक, मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़
  • कच्छ, गुजरात (सबसे बड़ा क्षेत्र)
  • सिमिलिपाल, ओडिशा
  • नोकरेक, मेघालय
  • सुंदरबन,पश्चिम बंगाल
  • शेषचलम, आंध्र प्रदेश
  • अगस्त्यमाला, कर्नाटक-तमिलनाडु-केरल
  • नीलगिरि, तमिलनाडु-केरल (पहला बायोस्फीयर रिज़र्व 1986)
  • मन्नार की खाड़ी, तमिलनाडु
  • ग्रेट निकोबार, अंडमान और निकोबार द्वीप
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