खाद क्या होता है | वर्गीकरण | प्रकार

खाद (Manure) जल के अतिरिक्त वह सब पदार्थ जो भूमि में मिलाए जाने पर उसकी उर्वरकता में सुधार करते हैं, खाद कहलाते हैं | खादों का वर्गीकरण (Classification of Manures) जैविक (कार्बनिक जीवांश या पूर्ण खाद) भारी कार्बनिक खाद(Bulky organics) – आयतन एवं वजन में भारी लेकिन तत्व % कम | गोबर की खाद कंपोस्ट हरी […]

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मशरूम की खेती कैसे की जाती है ? तथा इसके लाभ (Mushroom Cultivation)

मशरूम खेती (Mushroom farming) मशरूम एक कवक है जो स्वादिष्ट एवं पौष्टिक सब्जी के रूप में प्रयुक्त होता है, इसमें कार्बोहाइड्रेट एवं चर्बी की मात्रा कम तथा प्रोटीन की प्रचुर मात्रा पाई जाती है | इसको बिना मृदा के धान के पुआल एवं गेहूं के भूसे आदि पर सुगमता से उगाया जा सकता है | इसके […]

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जीवाणु जनित पशु रोग (Bacterial animal disease)

जीवाणु जनित पशु रोग (Bacterial animal disease) क्र.स. रोग प्रभावित पशु रोग कारक रोग के लक्षण बचाव और चिकित्सा 1 तितली ज्वर एवं गिल्टी रोग गौ-पशु, भेड़, बकरी, घोड़े, खच्चर, सूअर एवं कुत्ता बैसिलस एंथ्रेसिस अतितीव्र-प्रायः भेड़ में अचानक मृत्यु, मुंह, नाक, गुदा एवं भग द्वार से झाग युक्त काला रुधिर स्त्राव, मांसपेशियों में कंपन, […]

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सूक्ष्म तत्वों की संवेदनशीलता (Sensitivity to subtle elements)

सूक्ष्म तत्वों की संवेदनशीलता (Sensitivity to subtle elements) सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी के प्रति संवेदनशील पौधे निम्नलिखित है – सूक्ष्म तत्व प्रभावसूचक (संवेदनशील पौधे) 1 लोहा नींबू, केला, आडु, फूलगोभी, धान, जौ एवं ज्वार | 2 बोरॉन सेब, नाशपाती, गाजर एवं फूलगोभी | 3 मौलीब्डेनम सरसों वर्गीय पौधे, नींबू, जई एवं पालक| 4 तांबा […]

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समन्वित पीड़क प्रबंधन ( Integrated Pest management)

समन्वित पीड़क प्रबंधन (Integrated trouble management) इस अवधारणा के प्रथम प्रतिपादक गियर वंध क्लार्क (1961) थे यह योजना पीड़क नियंत्रण के उपयोग में लाई जा रही अनेक विधियों का ऐसा सहयोग है, जो आर्थिक पारिस्थितिक और सामाजिक मूल्यों और परिणामों को ध्यान में रखते हुए नाशक कीट की ऐसी व्यवस्था अथवा प्रबंध करेगा, जिससे नाशक […]

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अकार्बनिक और कार्बनिक खादो में अंतर ( Differences In Inorganic And Organic Fertilizers)

अकार्बनिक और कार्बनिक खादो में अंतर (Differences in inorganic and organic fertilizers) अकार्बनिक (उर्वरक) खादें कार्बनिक (जीवांश) खादें 1 इनके लगातार प्रयोग से भूमि की दशा खराब होती जाती है तथा फसल का तत्व के प्रति प्रभाव घटता है वायु संचार नहीं बढ़ता तथा ताप नियंत्रित नहीं रहता | इनके प्रयोग से भूमि की भौतिक, […]

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संगरोध (Quarantine) क्या होता है ?

संगरोध (Quarantine) बाहर से आयातित बीजों एवं अन्य प्रवध्यों तथा पादप उत्पादों का रोग, कीट एवं खरपतवार से मुक्त होना सुनिश्चित करने की प्रक्रिया को संगरोध कहते हैं | नाशी कीट एवं नाशक जीव अधिनियम 1914 के अंतर्गत भारत में आने वाले सभी पादप उत्पादों का रोग कीट व खरपतवार से मुक्त होना अनिवार्य है […]

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प्रोसीजर फार्मिंग (सूक्ष्म कृषि) [What is Procedure Farming in Hindi]

प्रोसीजर फार्मिंग (सूक्ष्म कृषि) जल फार्मिंग एक संबंधित कृषि प्रबंधन प्रणाली है इसके अंतर्गत उन महत्वपूर्ण कारकों को पहचाना जाता है जिसमें नियंत्रण योग्य कारकों के फलस्वरुप उत्पादन तथा उत्पादकता में कमी आती है तथा उन्हें दूर करने की प्रबंधकीय व्यवस्था की जाती है इसके अंतर्गत किसी खेत के भीतर फसल के संबंध में तथा […]

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भारतीय कृषि एवं उसकी प्रकृति (Indian agriculture and its nature)

भारतीय कृषि एवं उसकी प्रकृति (Indian agriculture and its nature) वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या बढ़कर एक अरब 21 करोड़ से अधिक हो गई है इस बढ़ती हुई जनसंख्या की खाद्यान्न आवश्यकता की पूर्ति के संदर्भ में भारतीय कृषि का महत्व स्वभाविक रुप से बढ़ जाता है देश की कुल राष्ट्रीय […]

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जैव उर्वरक (बायोफर्टिलाइजर) क्या होते हैं ?

भूमि की उर्वरता को टिकाऊ बनाए रखते हुए सतत फसल उत्पादन के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने प्रकृतिप्रदत्त जीवाणुओं को पहचानकर उनसे बिभिन्न प्रकार के पर्यावरण हितैषी उर्वरक तैयार किये हैं जिन्हे हम जैव उर्वरक (बायोफर्टिलाइजर) या ‘जीवाणु खाद’ कहते है। दूसरे शब्दों में हम कह सकते है की जैव उर्वरक जीवित उर्वरक है जिनमे सूक्ष्मजीव […]

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प्रमुख प्रदूषक की सूची, स्रोत तथा मानव और पर्यावरण पर उनके प्रभाव

प्रदूषक एक ऐसा पदार्थ है जो विशेषकर पानी या वायुमंडल को प्रदूषित करता है. यह ज्वालामुखी विस्फोट, कोयला और गैसोलीन को जलाने तथा अन्य मानवीय गतिविधियों के माध्यम से वातावरण में प्रवेश करता है। यहां, हम सामान्य जागरूकता के लिए प्रमुख प्रदूषकों की सूची, उनके स्रोत और मानव और पर्यावरण पर उनके प्रभाव का विवरण […]

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भारतीय अर्थव्यवस्था (भारतीय कृषि से सम्बंधित महत्वपूर्ण तथ्य)

 भारतीय अर्थव्यवस्था(Indian Economy) भारतीय कृषि से सम्बंधित महत्वपूर्ण तथ्य वर्तमान में भारत के GDP में कृषि क्षेत्र का 17.1% योगदान है, जबकि 1950-51 में कृषि क्षेत्र का योगदान 55.40 % था भारत में कृषि क्षेत्र का 60% भाग पूर्णत: वर्षा पर निर्भर है भारत में कृषि क्षेत्र के GDP का 0.3 % भाग कृषि शोध […]

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फसलों के उत्पादन तथा वितरण को प्रभावित करने वाले भौतिक और सामजिक कारक

भौतिक कारक जलवायु– जलवायु कृषि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पौधों को उनके विकास के लिए पर्याप्त गर्म तथा नम जलवायु की आवश्यकता होती है। पौधे के अानुवंशिक गुण भी जलवायु से प्रभावित होकर प्रदर्शित होते हैं | तापमान – फसल उत्पादन के लिय अनुकूल  तापमान की आवश्यकता होती है अनुकूल तापमान पर इन्जाइम की […]

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पारिस्थितिकी (इकोलॉजी) तथा मानव से सम्बन्ध

पारिस्थितिकी (इकोलॉजी) पारिस्थितिकी (इकोलॉजी) जीव विज्ञान की वह शाखा है जिसके अन्तर्गत जीवों और उसके बाह्य वातावरण के पारस्परिक संबंधों का अध्ययन किया जाता है।, प्रत्येक जन्तु या वनस्पति एक निश्चित वातावरण में रहता है। इकोलॉजी को तीन शाखाओं में बाँटा गया है- स्वपारिस्थितिकी – इसके अन्तर्गत किसी एक जीव विशेष या एक ही जाति के […]

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क्या होती हैं नकदी फसलें ??

नकदी फसलों के अंतर्गत उन व्यापारिक फसलों को सम्मिलित करते हैं , जिन्हें आमदनी के लिए सीधे या अर्ध प्रसंस्कृत रूप से किसानों द्वारा बेचा जाता है| इनमें गन्ना, तम्बाकू, रेशेदार फसलें कपास, जूट, मेस्ट एवं तिलहन फसलें जैसे सरसों, मूंगफली, अलसी आदि प्रमुख हैं | यद्यपि इनके अंतर्गत देश के कृषि क्षेत्रफल का केवल […]

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