लोकसभा के पदाधिकारी (Officers of The Lok Sabha)

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लोकसभा के पदाधिकारी (Officers of The Lok Sabha)


प्रोटेम स्पीकर (Protem Speaker)


  • आम चुनावों के बाद जब लोक सभा की प्रथम बैठक आमंत्रित की जाती है, तो राष्ट्रपति लोकसभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य को प्रोमोट स्पीकर के रूप में नियुक्त करता है प्रोटेम स्पीकर के निम्न कार्य हैं – 
  1. नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाना
  2. स्पीकर का चुनाव करना
  • प्रोटेम स्पीकर नए स्पीकर के चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है |
  • सर्वप्रथम वह बहुमत दल के उम्मीदवार को स्पीकर के रूप में प्रस्ताव रखता है |
  • यदि इस प्रस्ताव को लोकसभा बहुमत से स्वीकार कर लेती है तो लोकसभा स्पीकर का चुनाव हो जाता है अन्यथा प्रोटेम स्पीकर दूसरे सदस्य का प्रस्ताव रखता है |

लोकसभा अध्यक्ष / स्पीकर (speaker)

  • भारत में संसदीय प्रणाली अपनाने के कारण निम्न सदन लोकसभा को राजनीतिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त होता है |
  • इसी कारण लोकसभा अध्यक्ष को पद सूची के वरीयता क्रम में स्थान प्राप्त है |
  • हमारे यहां लोकसभा स्पीकर को लगभग वही शक्तियां प्राप्त हैं जो ब्रिटेन के हाउस ऑफ कॉमंस के स्पीकर को|
  • परंतु जहां बिट्रिश हाउस ऑफ कॉमन स्पीकर निर्दलीय व्यक्ति होता है वही भारत में स्पीकर अपनी दलीय सदस्यता का त्याग नहीं करता है इसके बावजूद वह निष्पक्ष कार्य करता है |
  • लोकसभा में उसके आचरण पर हटाने के मूल प्रस्ताव के अतिरिक्त चर्चा नहीं की जा सकती |

स्पीकर के कार्य एवं शक्तियाँ (Speaker works and powers)

  1. नियम 333 के तहत वह संसदीय कार्यवाही के किसी अंश को प्रकाशन प्रसारण से निकाल सकता है |
  2. नियम 222 के तहत अध्यक्ष इस बात का निर्णय करता है, कि किसी विषय में प्रथम दृष्टया विशेषाधिकार भंग या अवमानना का मामला बनता है या नहीं, अध्यक्ष की सहमति के बाद ही कार्यवाही की जा सकती है |
  3. सदन स्थगन की शक्ति अध्यक्ष में निहित परंतु स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान यह शक्ति अध्यक्ष की जगह पूरे सदन में स्थानांतरित हो जाती है |
  4. किसी विधेयक के धन विधेयक होने या ना होने के निर्णय का अधिकार स्पीकर को ही है |
  5. 52वें व 91 वें संशोधन अधिनियम के अनुसार दलबदल के अंतिम निर्णय की शक्ति स्पीकर में निहित है |
  6. अध्यक्ष किसी भी सदस्य को भाषण समाप्त कर बैठने का निर्णय दे सकता है इसे फ्लोरिंग सिस्टम कहते हैं |
  7. कोई भी सदस्य सदन में तब तक नहीं बोल सकता है, जब तक स्पीकर अनुमति नहीं देता इस बात का निर्णय भी अध्यक्ष ही करता है कि सदस्य किस क्रम में व कितने समय में बोलेंगे |
  8. राष्ट्रपति के पास कोई भी विधेयक को उसके हस्ताक्षर के बाद ही भेजा जाता है |
  9. किसी भी सांसद को गिरफ्तार करने के पूर्व अध्यक्ष को सूचित करना आवश्यक है
  10. संसदीय दलों को मान्यता देने के लिए मार्गदर्शी सिद्धांत निर्धारित करता है, विपक्षी नेता को भी मान्यता यही देता है
  11. लोकसभा महासचिव व समस्त पदाधिकारी उसी के अधीन कार्य करते हैं वह उसी के प्रति उत्तरदाई होते हैं |
  12. वह किसी भी सदस्य पर अनुशासनात्मक कार्यवाही करते हुए उसकी सदस्यता को निलंबित कर सकता है |
  13. वह संसद की तीनों समितियों नियम समिति कार्यमंत्रणा समिति सामान्य प्रयोजन समिति की अध्यक्षता करता है |
  14. स्पीकर संसद के दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन में पीठासीन होता है (अनुच्छेद 118 (4)) |
  15. सदन की अवमानना के लिए जब दंड का प्रस्ताव सदन में पारित हो जाता है, तो गिरफ्तारी का वारंट भी अध्यक्ष ही जारी करता है |
  16. सदन की प्रक्रिया विनियमित करने या सदन में व्यवस्था बनाए रखने में अध्यक्ष का आचरण न्यायालय की अधिकारिता के अधीन नहीं होगा (अनुच्छेद 122)|

      1919 के अधिनियम के पूर्व वायसराय ही विधान परिषद की अध्यक्षता करता था सर्वप्रथम 1919 के अनुच्छेद में ही निर्वाचित अध्यक्ष पद की रचना की गई और इस अधिनियम के तहत पहली बार 1931 में विधान परिषद गठित की गई और ‘सर फ्रेडरिक वाइट‘ को अध्यक्ष बनाया गया 1925 में स्वराज्य पार्टी के प्रयासों से प्रथम गैर सरकारी का प्रथम भारतीय नेता विट्ठल भाई पटेल विधान परिषद के अध्यक्ष बनाए गए और इसके बाद 1930 में मोहम्मद याकूब स्पीकर बने |

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