कंकालीय संयोजी ऊतक व तरल संयोजी ऊतक (Skeletal connective tissue and liquid connective tissue)

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कंकालीय संयोजी उत्तक (Skeleton Connective Tissue)

  • उपास्थि यह ठोस, अर्ध्द कठोर तथा लचीला संयोजी उत्तक है | लैरिंक्स, ट्रेकिया, बोंकाई आदि में मिलते हैं उपास्थि की रचना तीन घटकों द्वारा होती है |
  1. पेरीकॉन्ड्रियम
  2. मैट्रिक्स
  3. कॉन्ड्रियोसाइट्स
  • शार्क मछली का पूरा कंकाल तंत्र उपास्थि का बना होता है |
  • अस्थि एक ठोस, कठोर संयोजी उत्तक है | इसके मेट्रिक्स में कैल्शियम तथा फास्फेट के एपोटाइट लवण होते हैं ऑस्टिओसाइट अस्थि का निर्माण करती है इसके मैट्रिक्स को ओसीन कहते हैं |
  • स्तनधारियों की लंबी अस्थियों के मेट्रिक्स में एक हैवर्सियन नलिका होती है जो रुधिर द्वारा अस्थि के अंदर पोषक पदार्थ तथा ऑक्सीजन का परिवहन करता है |
  • किसी अस्ठि के जल जाने से कार्बनिक पदार्थ जल जाता है, जबकि अकार्बनिक पदार्थ के रूप में शेष रह जाता है अस्थि में कार्बनिक तथा अकार्बनिक लवणों का अनुपात क्रमशः 62 प्रतिशत और 38% होता है जिन अस्थियों में हैवर्सियन तंत्र पाया जाता है, उन्हें संहत अस्थि कहते हैं |
  • स्नायु यह अस्थि को अस्थि से जोड़ता है |
  • कंडरा यह संयोजी उत्तक है जो पेशी को अस्थि से जोड़ता है |

तरल संयोजी ऊतक (Liquid Connective Tissue)

  • रुधिर एवं लसीका तरल संयोजी उत्तक है यह शरीर का 8% भाग होता है |

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