भारत के छठे राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

नीलम संजीव रेड्डी जीवन परिचय

  • नीलम संजीव रेड्डी का जन्म 19 मई, 1913 को आंध्र प्रदेश के अनंतपुरम ज़िले के इलूर गाँव में हुआ था।
  • इनके पिता का नाम नीलम चिनप्पा रेड्डी था
  • नीलम संजीव रेड्डी का विवाह 8 जून, 1935 को नागा रत्नम्मा के साथ सम्पन्न हुआ था। इनके एक पुत्र एवं तीन पुत्रियाँ थी।
  • नीलम संजीव रेड्डी की प्राथमिक शिक्षा अड़यार (मद्रास) से और उसके आगे की शिक्षा अनंतपुर ज़िले के आर्ट्स कॉलेज से हुई थी।
  • वे महात्मा गांधी के विचारों से काफी प्रभावित थे।
  • मात्र अठारह वर्ष की आयु में नीलम संजीव रेड्डी स्वतंत्रता संग्राम में कूद गए थे।
  • कॉलेज के दौरान उन्होंने महात्मा गांधी के आह्वान पर स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिये अपनी शिक्षा को बीच में ही छोड़ दिया था।
  • स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्होंने सविनय अवज्ञा और भारत छोड़ो जैसे विभिन्न आंदोलनों में बढ चढकर हिस्सा लिया।
  • नीलम संजीव रेड्डी अपने राजनीतिक कैरियर में काॅन्ग्रेस में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रहे।
  • वर्ष 1937 में वे आंध्र प्रांतीय काॅॅन्ग्रेस समिति (APCC) के सबसे कम उम्र के सचिव बने।
  • वर्ष 1940-45 के दौरान उन्हें स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लेने के लिये कई बार कारावास भेजा गया।
  • रेड्डी का विधायी कॅॅरियर वर्ष 1946 में तब शुरू हुआ जब वे मद्रास विधानसभा के लिये चुने गए और मद्रास काॅॅन्ग्रेस विधायक दल के सचिव बने।
  • उन्होंने वर्ष 1956–60 और 1962–64 में नवगठित आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया।
  • 26 मार्च, 1977 को नीलम संजीव रेड्डी को सर्वसम्मति से लोकसभा का स्पीकर चुना गया
  • 13 जुलाई, 1977 को स्पीकर पद से इस्तीफा दे दिया क्योंकि इन्हें राष्ट्रपति पद हेतु नामांकित किया जा रहा था।
  • 25 जुलाई, 1977 को नीलम संजीव रेड्डी को निर्विरोध रूप से देश का छठा राष्ट्रपति चुन लिया गयाऔर इसी के साथ वे देश के सबसे कम आयु (64 वर्ष) के राष्ट्रपति भी बने।
  • राष्ट्रपति के रूप में अपने दायित्त्वों के निर्वाह के पश्चात् नीलम संजीव रेड्डी 25 जुलाई, 1982 को कार्यकाल से मुक्त हो गए।
  • पद छोड़ने के लगभग 14 वर्षों बाद 1 जून, 1996 में 83 वर्ष की आयु में डॉ. नीलम संजीव रेड्डी का उनके पैतृक स्थान पर निधन हो गया।
  • आंध्र प्रदेश के कृषक परिवार में जन्मे नीलम संजीव रेड्डी की छवि कवि, अनुभवी राजनेता एवं कुशल प्रशासक के रूप में थी।