सर सैयद अहमद खान का संक्षिप्त जीवन परिचय

सर सैयद अहमद खान

  • सर सैयद अहमद खान का जन्म 17 अक्टूबर 1817 को दिल्ली के सादात (सैयद) ख़ानदान में हुआ था, जो मुगल दरबार के करीब था।
  • उसके पिता का नाम सैयद मोहम्मद मुत्तकी और उसकी माता का नाम अजीजुन्निशा बेगम था।
  • उन्हें बचपन से ही पढ़ने-लिखने का शौक था और उनके पिता की तुलना में उनकी मां का उन पर विशेष प्रभाव था।
  • 22 वर्ष की अवस्था में पिता की मृत्यु के बाद परिवार को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और थोड़ी सी शिक्षा के बाद ही उन्हें आजीविका कमाने में लगना पड़ा।
  • वह कई प्रतिभाओं के धनी (सिविल सेवक, पत्रकार, शिक्षाविद, समाज सुधारक, इतिहासकार) थे।
  • मुस्लिम समाज के सुधार के लिए प्रयासरत सर सैयद ने 1858 में मुरादाबाद में आधुनिक मदरसे की स्थापना की।
  • उन्होंने 1830 में ईस्ट इंडिया कंपनी में क्लर्क के रूप में काम करना शुरू किया, लेकिन 1841 में मैनपुरी में डिप्टी जज की योग्यता प्राप्त की और विभिन्न न्यायिक विभागों में विभिन्न स्थानों पर काम किया।
  • अंग्रेजों ने इनकी सेवा व निष्ठा को देखते हुए इन्हें ”सर” की उपाधि से विभूषित किया था।
  • वर्ष 1857 के विद्रोह से पहले वह ब्रिटिश प्रशासन की सेवा में कार्यरत थे।
  • भारतीय परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने वर्ष 1857 के विद्रोह के कारणों को स्पष्ट करने के लिये ‘द कॉज़ेज़ ऑफ द इंडियन रिवॉल्ट’ नामक पुस्तक लिखी।
  • सर सैयद को उन महत्त्वपूर्ण मुस्लिम सुधारकों के रूप में जाना जाता है जिन्होंने मुस्लिम समाज के सुधार के लिये शैक्षिक अवसरों को बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभाई।
  • सर सैयद ने महसूस किया कि मुस्लिम समुदाय की प्रगति तभी संभव है, जब वह आधुनिक शिक्षा ग्रहण करेगा।
  • सर सैयद अहमद खान ने अलीगढ़ आंदोलन की शुरुआत की।
  • उन्होंने “साइंटिफिक सोसाइटी” की स्थापना की, जिसने कई शैक्षिक पुस्तकों के अनुवाद प्रकाशित किए, उर्दू और अंग्रेजी में एक द्विभाषी पत्रिका निकाली।
  • मई 1875 में उन्होंने अलीगढ़ में एक मुस्लिम स्कूल ‘मदरसतुलुल्लम’ की स्थापना की। 1920 में इसे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में बदल दिया गया।
  • यह एक व्यवस्थित आंदोलन था जिसका मूल उद्देश्य मुस्लिम समुदाय के सामाजिक, राजनीतिक और शैक्षिक स्थिति में सुधार करना था।
  • बाद के वर्षों में सर सैयद द्वारा भारतीय मुसलमानों को राष्ट्रीय आंदोलन में शामिल नहीं होने के लिये प्रोत्साहित किया गया जिसके कारण आलोचकों ने उन पर सांप्रदायिकता और अलगाववाद की विचारधारा को प्रोत्साहित करने का भी आरोप लगाया।
  • सर सैयद अहमद खान की मृत्यु 27 मार्च 1898 को हृदय गति रुक जाने के कारण हुई।