छत्रपति शिवाजी महाराज का संक्षिप्त परिचय

छत्रपति शिवाजी महाराज

  • छत्रपति शिवाजी महाराज मराठा साम्राज्य के संस्थापक थे।
  • शिवाजी का जन्म 6अप्रैल, 1627 में पुणे के पास स्थित शिवनेर दुर्ग में हुआ था।
  • शिवाजी के पिता का नाम शाहजी भोसले तथा माता का नाम जीजाबाई था।
  • माता जीजाबाई धार्मिक स्वभाव वाली होते हुए भी गुण-स्वभाव और व्यवहार में वीरंगना नारी थीं। इसी कारण उन्होंने बालक शिवा का पालन-पोषण रामायण, महाभारत तथा अन्य भारतीय वीरात्माओं की उज्ज्वल कहानियां सुना और शिक्षा देकर किया था।
  • दादा कोणदेव के संरक्षण में उन्हें सभी तरह की सामयिक युद्ध आदि विधाओं में भी निपुण बनाया था।
  • माता ने धर्म, संस्कृति और राजनीति की भी उचित शिक्षा दिलवाई थी। उस युग में परम संत रामदेव के संपर्क में आने से शिवाजी पूर्णतया राष्ट्रप्रेमी, कर्त्तव्यपरायण एवं कर्मठ योद्धा बन गए।
  • बचपन में शिवाजी अपनी आयु के बालक इकट्ठे कर उनके नेता बनकर युद्ध करने और किले जीतने का खेल खेला करते थे।
  • शिवाजी ने गंगाभट्ट नामक प्रसिद्ध विद्वान से अपना राज्यभिषेक करवाया तथा छत्रपति की उपाधि धारण की।
  • शिवाजी ने रायगढ़ को मराठों की राजधानी बनाया।
  • छत्रपति शिवाजी महाराज का विवाह सन् 14 मई 1640 में सइबाई निम्बालकर के साथ लाल महल, पुना में हुआ था।
  • छत्रपति शिवाजी के पुत्र का नाम सम्भाजी था।
  • शिवाजी को कुचलने के लिए राजा जयसिंह ने बीजापुर के सुल्तान से संधि कर पुरन्दर के क़िले को अधिकार में करने की अपने योजना के प्रथम चरण में 24 अप्रैल, 1665 ई. को ‘व्रजगढ़’ के किले पर अधिकार कर लिया।
  • पुरन्दर के किले की रक्षा करते हुए शिवाजी का अत्यन्त वीर सेनानायक ‘मुरार जी बाजी’ मारा गया।
  • पुरन्दर के क़िले को बचा पाने में अपने को असमर्थ जानकर शिवाजी ने महाराजा जयसिंह से संधि की पेशकश की। दोनों नेता संधि की शर्तों पर सहमत हो गए और 22 जून, 1665 ई. को ‘पुरन्दर की सन्धि’ सम्पन्न हुई।
  • छत्रपति शिवाजी ने ही भारत में पहली बार गुरिल्ला युद्ध का आरम्भ किया था।गोरिल्ला युद्ध एक प्रकार का छापामार युद्ध है। 
  • गुरिल्ला युद्ध का उल्लेख उस काल में रचित ‘शिव सूत्र’ में मिलता है। 
  • शिवाजी का अंतिम महत्वपूर्ण सैन्य अभियान 1677 में कर्नाटक अभियान था।
  • शिवाजी की 1680 में कुछ समय बीमार रहने के बाद अपनी राजधानी पहाड़ी दुर्ग राजगढ़ में 3 अप्रैल को मृत्यु हो गई।
  • उनके मृत्यु के बाद साम्राज्य को उनके बेटे संभाजी ने संभाल लिया।

शिवाजी के प्रशासन में आठ मंत्रियों की परिषद थी जिसे अष्टप्रधान कहते थे।

  1. पेशवा- मुख्यमंत्री
  2. अमात्य- वित्तमंत्री
  3. पंडितराव-धार्मिक मामलों में छत्रपति को सलाह देता था
  4. सर-ए-नौबत –सेना का प्रधान
  5. न्यायाधीश –न्याय विभाग
  6. वाकिया नवीस –गृहमंत्री
  7. सुमत या दबीर –विदेश विभाग दरबारी शिष्टाचार
  8. शुरू-नवीस – पत्राचार विभाग