प्राचीन भारत के इतिहास के स्त्रोत – OneLiner Notes in Hindi

  • प्राचीन भारतीय इतिहास के सन्दर्भ में स्रोतों को कितने भागों में विभक्त किया जा सकता है। – साहित्यिक स्रोत, पुरातात्विक स्त्रोत व विदेशी विवरण
  • ऐतिहासिक दृष्टि पर आधारित पहला भारतीय ग्रन्थ कौन-सा है? कल्हणकृत ‘राजतरंगिणी’ 
  • भारतीय समाज मुख्य रूप से कितने भागों में विभाजित था? ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, 
  • स्त्रोतों के रूप में धार्मिक साहित्य को कितने उपवर्गों में विभाजित किया गया है?- हिन्दू धर्म से सम्बद्ध साहित्य, बौद्ध साहित्य व जैन साहित्य
  • सबसे प्राचीन वेद कौन-सा है? ऋग्वेद
  • पुराणों की संख्या कितनी बताई गई है? 18 
  • ऋग्वेद के पश्चात् किन ग्रन्थों की रचना हुई?सामवेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद् 
  • पुराणों से कौन-से प्राचीन भारतीय राजवंशों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है?- शिशु, नन्द, मौर्य, शुंग, कण्व, सातवाहन व गुप्त काल आदि 
  • पुराणों से कौन-से विदेशियों के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है? शक, यवन, हूण आदि 
  • बौद्धों के प्राचीन धार्मिक ग्रन्थ पिटक कौन-कौन से हैं?
  • सुत्तपिटक, विनयपिटक, अभिधम्मपिटक। 
  • पिटकों की रचना कहाँ व किस भाषा में हुई?श्रीलंका में, पालि भाषा में 
  • दक्षिणी बौद्धमत के ग्रन्थ कौन-कौन से हैं? – महावंश व दीपवंश 
  • बुद्धचरित की रचना किस रचनाकार द्वारा किसके शासनकाल में हुई? कनिष्क के शासनकाल में अश्वघोष द्वारा 
  • बौद्धों के प्रसिद्ध ग्रंथ जातकों की संख्या कितनी है? 549
  • जैन धर्म के सूत्र ग्रन्थ कौन-कौन से हैं?कल्प सूत्र, भगवती सूत्र, आचारांग सूत्र आदि 
  • जैन ग्रन्थों में ऐतिहासिक दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण ग्रन्थ कौन-सा है? हेमचन्द्र रचित ‘परिशिष्ट पर्व’ ऐतिहासिक महत्व के प्रथम ग्रंथ की रचना कौन-सी है?
  • ‘हर्षचरित’ रचना
  • प्राचीन भारत के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण जानकारी देने वाला ग्रन्थ कौन-सा है? चंदबरदाई द्वारा रचित ‘पृथ्वीराज रासो’
  • ऐतिहासिक ग्रन्थों में महत्वपूर्ण ‘राजतरंगिणी’ की रचना किसने की? 12वीं शताब्दी में कश्मीर के प्रसिद्ध विद्वान कल्हण ने 
  • सौराष्ट्र क्षेत्र (गुजरात) में रचित महत्वपूर्ण ऐतिहासिक ग्रन्थ कौन-कौन से हैं? रसमाला, कीर्तिकौमुदी, प्रबंध चिंतामणि (मेरूतुंग), प्रबंध कोष (राजशेखर) आदि 
  • संस्कृत के प्रथम नाटककार भास की रचनाओं ‘स्वप्नवासवदत्ता’ व ‘प्रतिज्ञायौगन्धरायण’ से किसकी जानकारी प्राप्त होती है?वत्सराज उवयन व उनकी समकालीन परिस्थितियों की
  • मौर्यकाल की आरम्भ अवस्था के सम्बन्ध में कौन-सी रचना जानकारी प्रदान करती है? विशाखदत्त द्वारा रचित मुद्राराक्षस 
  • कालिदास ने ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ में किसकी जानकारी दी है? गुप्तकालीन परिस्थितियों की
  • मौर्य के उत्तराधिकारी शुंगों के बारे में कौन-सा नाटक जानकारी देता है? कालिदास द्वारा रचित’मालविकाग्निमित्रम्’ 
  • मौर्यों की प्रशासनिक व्यवस्था के संबंध में कौन-सा ग्रन्थ महत्वपूर्ण जानकारी देता है?- कौटिल्य (चाणक्य ) द्वारा रचित ‘अर्थशास्त्र’ 
  • अभिलेखों की दृष्टि से किस शासक का काल सर्वाधिक महत्वपूर्ण है? मौर्य सम्राट अशोक का काल 
  • भारतीय इतिहास के निर्माण में किन अभिलेखों से सहायता मिलती है? अशोक के अभिलेख, कलिंगराज खारवेल का हाथी गुम्फा अभिलेख, समुद्रगुप्त का प्रयाग प्रशस्ति अभिलेख, चन्द्रगुप्त द्वितीय का महरौली स्तम्भ लेख, स्कंदगुप्त का भीतरी स्तम्भलेख आदि 
  • सातवाहन, शकों व कुषाणों के सम्बन्ध में मुख्य रूप से किस पर निर्भर रहना पड़ता है? सिक्कों पर
  • गुप्तकाल के अधिकांश सिक्कों पर विष्णु एवम् गरुड़ के चित्र अंकित होने से क्या प्रतीत होता है? गुप्त शासक विष्णु उपासक थे 
  • विदेशों में प्राप्त कौन से स्मारक भारत के प्राचीन इतिहास को समझने में सहायक हुए हैं?
  • जावा में स्थित बोरोबुदर मंदिर व प्रबनम मंदिर, कम्बोडिया में अंकोखाट मन्दिर, बोर्नियों में (मुकरकमन) में मिली विष्णु की प्रसिद्ध स्वर्ण मूर्ति, मलाया में शिव, पार्वती, गणेश की मूर्तियाँ।
  • प्राचीन भारत के इतिहास को व्यवस्थित रूप प्रदान करने में किन-किन विदेशी विवरणों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है?
  • यूनानी विवरण, चीनी विवरण, तिब्बती विवरण। 
  • कौन-से यूनानी विवरण भारतीय इतिहास के सन्दर्भ में विशेष तौर पर महत्वपूर्ण हैं?
  • हेरोडोट्स, नियार्कस, मेगस्थनीज, डायमेकस, कार्टियस, एरियन, प्लूटार्क, स्ट्रैबो आदि के विवरण प्रमुख हैं 
  • मेगस्थनीज की किस रचना से चन्द्रगुप्त मौर्य के राज्य के बारे में जानकारी मिलती है? इण्डिका –
  • चीनी यात्री फाह्यान किस शासक के समय भारत आया था?चन्द्रगुप्त द्वितीय के समय।
  • मुख्य तिब्बती विवरण कौन-कौन से हैं? कंग्युर व तंग्युर