Economy

राष्ट्रीय कृषि नवीनीकरण परियोजना एवं राष्ट्रीय कृषि विकास योजना

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राष्ट्रीय कृषि नवीनीकरण परियोजना (National agricultural renewal project)

  • भारत सरकार ने इसे लागू करने की जिम्मेदारी भारतीय कृषि अनुसंधान (ICAR) कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग(DARE) कृषि मंत्रालय को सौंपी सितंबर 2006 में शुरू की गई |
  • इस योजना के परिणाम स्वरुप संगठनात्मक कार्य निपुणता, कार्यकुशलता, कृषि मूल्य श्रृंखला, गैर-लाभकृत क्षेत्रों में जीविका सुरक्षा, क्षमता निर्माण और मूल एवं नीति अनुसंधान में सकारात्मक परिवर्तन हुआ |
  • इस परियोजना का उद्देश्य कृषकों की आय में वृद्धि करना तथा कृषकों की आय में वृद्धि को कृषि विकास का मापदंड बनाना है |

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (National agricultural development scheme)

  • कृषि में सार्वजनिक निवेश बढ़ाने के लिए राज्यों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में 25,000 करोड़ रुपये के साथ इस योजना की शुरुआत की गई थी |
  • इस योजना के तहत केंद्रीय सहायता का 50% कृषि और संबंधित क्षेत्रों पर राज्य आयोजना व्यय के प्रतिशत से जोड़ा गया है इसके साथ ही इसे मनरेगा के साथ संयोजित किया गया है |
  • राष्ट्रीय कृषि विकास योजना का लक्ष्य कृषि एवं समवर्गी क्षेत्रों का समग्र विकास सुनिश्चित करते हुए 11वीं योजना अवधि के दौरान कृषि क्षेत्र में 4 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि प्राप्त करना है।

योजना के प्रमुख लक्ष्य (Main goals of the plan)

  • कृषि और समवर्गी क्षेत्रों में सार्वजनिक निवेश में वृद्धि करने के लिए राज्यों को प्रोत्साहित करना,
  • राज्यों को कृषि और समवर्गी क्षेत्र की योजनाओं के नियोजन व निष्पादन की प्रक्रिया में लचीलापन तथा स्वायतता प्रदान करना,
  • कृषि-जलवायुवीय स्थितियाँ, प्रौद्योगिकी तथा प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर जिलों और राज्यों के लिए कृषि योजनाएँ तैयार किया जाना सुनिश्चित करना,
  • यह सुनिश्चित करना कि राज्यों की कृषि योजनाओं में स्थानीय जरूरतों/फसलों/ प्राथमिकताओं को बेहतर रूप से प्रतिबिंबित किया जाए,
  • केन्द्रक हस्तक्षेपों के माध्यम से महत्वपूर्ण फसलों में उपज अंतर को कम करने का लक्ष्य प्राप्त करना,
  • कृषि और समवर्गी क्षेत्रों में किसानों की आय को अधिकतम करना, और
  • कृषि और समवर्गी क्षेत्रों के विभिन्न घटकों का समग्र ढंग से समाधान करके उनके उत्पादन और उत्पादकता में मात्रात्मक परिवर्तन करना।

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत प्रमुख क्षेत्र (Major areas under National Agriculture Development Scheme)

  • गेहूँ, धान, मोटे अनाज, छोटे कदन्न, दालों, तिलहनों जैसी प्रमुख खाद्य फसलों का समेकित विकास,
  • कृषि यंत्रीकरण,
  • मृदा स्वास्थ्य के संवर्धन से संबंधित क्रियाकलाप,
  • पनधारा क्षेत्रों के अन्दर तथा बाहर वर्षा सिंचित फार्मिंग प्रणाली का विकास और साथ ही पनधारा क्षेत्रों, बंजर भूमियों, नदी घाटियों का समेकित विकास,
  • राज्य बीज फार्मों को सहायता,
  • समेकित कीट प्रबंधन योजनाएँ,
  • गैर फार्म क्रियाकलापों को बढ़ावा देना,
  • मण्डी अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण तथा मण्डी विकास,
  • विस्तार सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए अवसंरचना को मजबूत बनाना,
  • बागवानी उत्पादन को बढ़ावा देने संबंधी क्रियाकलाप तथा सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों को लोकप्रिय बनाना,
  • पशुपालन एवं मात्स्यिकी विकाय क्रियाकलाप,
  • भूमि सुधारों के लाभानुभोगियों के लिए विशेष योजनाएँ,
  • परियोजनाओं की पूर्णता की अवधारणा शुरू करना,
  • कृषि/बागवानी को बढ़ावा देने वाले राज्य सरकार के संस्थाओं को अनुदान सहायता,
  • किसानों के अध्ययन दौरे,
  • कार्बनिक तथा जैव-उर्वरक एवं
  • अभिनव योजनाएँ।

बजट स्वीकृति (Budget acceptance)

  • 11वीं पंचवर्षीय योजनावधि के दौरान इस योजना के लिए 25 हजार करोड़ रुपये स्वीकृत किये गये हैं।
  • राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में रेशम उत्पादन और संबंध गतिविधियों का समावेश
  • राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के अंतर्गत वित्त पोषण की पात्रता के लिए सरकार ने रेशम उत्पादन और सम्बद्ध गतिविधियों का RKVY के तहत समावेश का फैसला किया है।
  • इसमें रेशम कीट के उत्पादन के चरण तक रेशम उत्पादन शामिल रहेगा और साथ ही कृषि उद्यम में रेशम कीट के उत्पादन व रेशम धागे के उत्पादन से लेकर विपणन तक विस्तार प्रणाली भी।
  • अब RKVY का लाभ रेशम उत्पादन विस्तार प्रणाली में सुधार, मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर करने, वर्षा से पोषित रेशम उद्योग को विकसित करने तथा एकीकृत कीट प्रबंधन के लिए में लिया जा सकता है।
  • लाभ रेशम के कीड़ों के बीज बेहतर करने तथा क्षेत्र के मशीनीकरण के लिए होंगे। यह निर्णय बाजार के बुनियादी ढांचे के विकास तथा सेरी उद्यम को बढ़ावा देने में सहायता प्रदान करेगा।
  • गैर कृषि गतिविधियों के लिए परियोजनाएं हाथ में ली जा सकती हैं और भूमि सुधार के लाभार्थियों जैसे सीमांत व छोटे किसानों आदि को विशेष योजनाएं स्वीकृत कर रेशम कीट पालन किसान को अधिकतम लाभ दिया जा सकता है।


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