कृषि मूल्य नीति (Agricultural value policy)


  • भारत में सर्वप्रथम 1955 में कृषि लागत आयोग का गठन किया गया था| इसके अध्यक्ष प्रोफेसर दंतेवाड़ा को बनाया गया था |
  • इस आयोग की स्थापना का मुख्य उद्देश्य किसानों को अधिक उत्पादन के लिए प्रेरित करने हेतु उन्हें उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान करना था |
  • 1985 में इसका नाम बदलकर कृषि लागत एवं कीमत आयोग(CACP) कर दिया गया भारत में कृषि मूल्य नीति का उद्देश्य उत्पादक एवं उपभोक्ता दोनों वर्गों को सुरक्षा प्रदान करना है |
  • उत्पादक के स्तर पर अधिक उत्पादन होने पर उन्हें कीमत घटाने की स्थिति में सुरक्षा प्रदान करना तथा उपभोक्ता के स्तर पर उन्हें उचित मूल्य पर खाद्यान्न उपलब्ध कराना है |
  • कुल मिलाकर CACP का उद्देश्य है कि कृषि उत्पादों की कीमत को स्थिर करना जिससे पूरी अर्थव्यवस्था में कीमत को स्थिर किया जा सके |

न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price)

  • सरकार द्वारा प्रतिवर्ष 24 कृषि उत्पादों के लिए ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ की घोषणा की जाती है, उसका उद्देश्य होता है कि किसी वस्तु के अधिक उत्पादन की स्थिति में उसकी कीमत को एक सीमा के नीचे आने पर उत्पादकों को सुरक्षा प्रदान करना |
  • किसान अपने उत्पादों को बाजार में सही कीमत और बेचने के लिए स्वतंत्र होता है सरकार किसानों को इस बात की गारंटी देती है कि यदि बाजार के मूल्य में कमी आई तो वह न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उसके उत्पाद को खरीद लेंगी|
  • जिससे किसानों को अधिक उत्पादन के लिए प्रेरणा मिलती है सरकार प्रत्येक फसल की बुवाई से पहले ऐसी घोषणा करती है, इसकी घोषणा सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक के बाद की जाती है |

खरीद मूल्य (Purchase price)

  • सरकार द्वारा इसकी घोषणा रवि तथा खरीफ फसल की कटाई के समय की जाती है| यह न्यूनतम समर्थन मूल्य के बराबर या उससे अधिक होता है किंतु किसी भी स्थिति में यह न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम नहीं हो सकता है |


आर्थिक मूल्य (Economic value)

  • सरकार द्वारा बफर स्टॉक के लिए अनाजों की खरीद की जाती है, इसके साथ ही इनके परिवहन भंडारण तथा अन्य प्रबंधकीय कार्य में भी खर्च करना पड़ता है इन सभी खर्चों को जोड़कर अनाज का जो मूल्य होता है उसे ही आर्थिक मूल्य कहा जाता है |

जारी मूल्य (Current price)

  • अलग-अलग योजनाओं के लिए सरकार जिस मूल्य पर अनाज जारी करती है उसे ही जारी मूल्य कहा जाता है |
  • सरकार द्वारा कल्याणकारी योजनाओं के लिए जारी किए जाने वाले अनाजों का ‘जारी मूल्य’ आर्थिक मूल्य से कम होता है|आर्थिक मूल्य एवं जारी मूल्य के बीच के अंतर को ‘खाद्यान्न सब्सिडी’कहा जाता है|

मूल्य निर्धारण प्रणाली(Pricing system)

  • सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य के निर्धारण के लिए लागत प्रणाली का उपयोग किया जाता है| इसके अंतर्गत दो प्रकार की लागत का निर्धारण किया गया है C-2लागत तथा C-3 लागत |
  • C-2 लागत पर किसानों द्वारा कृषि कार्य में किया गया व्यय, श्रम तथा विद्यालयों को जोड़ा जाता है यदि जमीन पट्टे पर ली जाती है तो इसमें जमीन का किराया भी जोड़ा जाता है |
  • C-3 लागत में C-2 लागत के साथ-साथ प्रबंधकीय पारिश्रमिक के रूप में C-2 लागत का 10% जोड़ दिया जाता है |
  • C-1 लागत = फसल उत्पादन में किसानों का कुल व्यय +किसानों के द्वारा प्रयुक्त घरेलू संसाधनों का मूल्य
  • C-2 लागत = C-1 लागत+ 10% लाभ
  • C-3 लागत = C-2 लागत + किसानों के को प्रबंधकीय पारिश्रमिक का हिसाब लगाने के लिए C-2 लागत का 10%

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