क्या था द्वैत शासन ? | बंगाल में द्वैध शासन

क्या था द्वैत शासन ?

द्वैत शासन का अर्थ है बिना उत्तरदायित्व वाला अधिकार होता था और बिना अधिकार वाला उत्तरदायित्व यानि जिसके पास अधिकार है उसकी कोई जबाबदेही नही है जिसके पास अधिकार नहीं है उसके पास उत्तरदायित्व है (Rights without Responsibility and Responsibility without Rights)

बंगाल में द्वैध शासन (Dual Govt.)

  • फरवरी, 1756 में मीर जाफर के निधन के पश्चात उसके पुत्र नजमुद्दौला को अंग्रेजों द्वारा निम्न शर्तों पर नवाब स्वीकार किया गया
  • निजामत (सैन्य संरक्षण एवं विदेशी मामले) पूर्णतया कंपनी के हाथ में रहेगी।
  • दीवानी मामले के लिए डिप्टी गवर्नर की नियुक्ति की गई, जिसको मनोनीत करने का अधिकार कंपनी को था तथा कंपनी की अनुमति के वगैर जिसे हटाया नहीं जा सकता था।
  • इस प्रकार शासन की वास्तविक शक्ति कंपनी के हाथों में थी एवं दैनिक कार्य नवाब के हाथों में।
  • इस काल में बंगाल में दो शासक हो गये, इसे ही द्वैध शासन प्रणाली कहते हैं।