क्या है तुंगभद्रा नदी का महत्त्व?

तुंगभद्रा नदी

  • यह दक्षिण भारत की एक पवित्र नदी है जो कर्नाटक राज्य के भद्रावती जिला से होकर आंध्र प्रदेश में बहती है। नदी का प्राचीन नाम पम्पा था। यह नदी लगभग 513 किमी. लंबी है।
  • रामायण में तुंगभद्रा को पंपा के नाम से जाना जाता था। तुंगभद्रा नदी का जन्म तुंगा एवं भद्रा नदियों के संगम से हुआ है। तुंगा और भद्रा दोनों नदियाँ पश्चिमी घाट के पूर्वी ढलानों से निकलती हैं।
  • तुंगभद्रा नदी के मार्ग का अधिकांश भाग दक्कन के पठार के दक्षिणी भाग में स्थित है। नदी मुख्य रूप से वर्षा द्वारा पोषित है।
  • इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ भद्रा, हरिद्रा, वेदवती, तुंगा, वरदा और कुमदावती हैं।
  • पूर्वी कृष्णा नदी में मिलने से पहले यह कमोबेश उत्तर-पश्चिम दिशा में बहती है। कृष्णा नदी अंत में बंगाल की खाड़ी में मिलती है।

महत्त्व:

  • कर्नाटक तथा आंध्र प्रदेश राज्यों में भूमि के बड़े हिस्से को सिंचित करने के अलावा यह जलविद्युत भी उत्पन्न करता है और बाढ़ को रोकने में मदद करता है।
  • तुंगभद्रा नदी पर एक बाँध बनाया गया है, जिसे पम्पा सागर के नाम से भी जाना जाता है, कर्नाटक के बल्लारी ज़िले के होसापेटे में तुंगभद्रा नदी पर बना एक बहुउद्देशीय बाँध है। इसका निर्माण वर्ष 1953 में डॉ. थिरुमलाई अयंगर द्वारा किया गया था।
  • तुंगभद्रा जलाशय में 101 टीएमसी (हज़ार मिलियन क्यूबिक फीट) की भंडारण क्षमता है, जिसमें जलग्रहण क्षेत्र 28000 वर्ग किलोमीटर तक फैला हुआ है। इसकी ऊँचाई लगभग 49.5 मीटर है।
  • यह कर्नाटक के चावल के कटोरे के रूप में विख्यात रायचूर  बेल्लारी, और कोप्पल और पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में कडप्पा ,अनंतपुर, एवं कुरनूल के 6 सूखा प्रवृत्त जिलों की जीवन रेखा है।