पौधों के जीवन में जल का महत्व:- (Significance of Water in the Life of Plants)

जैसा की हम सभी जानते है कि सभी जीव धारियों के लिए जल आवश्यक है। और जल के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। इसलिए तो कहा गया है- ‘जल ही जीवन है।’

पौधों के जीवन में जल की उपयोगिता निम्न क्रियाओं पर निर्भर करती हैं। जैसे:-
1. जीवद्रव्य का प्रमुख अंश
2. बीजों के अंकुरण के लिए3. प्रकाश-संश्लेषण के द्वारा भोजन बनाने में4. पौधों का ताप नियंत्रण करने के लिए5. पोषक पदार्थों का स्थानांतरण के लिए6. कोशिकाओं की स्फीति दशा बनाए रखने के लिए7. पौधों में परागण की क्रिया के लिए (प्रजनन क्रिया)8. फलों व बीजों का प्रकीर्णन के लिए
जीवद्रव्य का प्रमुख अंश:- (Major Constituent of Protoplasm)

सभी जीवित कोशिकाओं के जीवद्रव्य (Protoplasm) का लगभग 90% भाग जल है। यह जीवद्रव्य को कलिलीय (Colloidal) अवस्था में बनाए रखता है। और वृहद अणुओं शर्करा के अणुओं के लिए विलायक (Solvent) के रूप में कार्य करता है।

बीजों के अंकुरण के लिए :- (Germination of Seeds) 

सभी प्रकार के बीजों में अंकुरण के लिए जल आवश्यक है। जैसे ही कोई बीज जल शोषित करता है। तो इसके भोज्य-पदार्थ घुलित अवस्था में हो जाते हैं। विकर (Enzymes) सक्रिय हो जाते हैं और अंकुरण प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है।

प्रकाश-संश्लेषण के द्वारा भोजन बनाने में :- (Photosynthesis) 

हरे पौधे कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) तथा जल (H2O) की सहायता से प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया द्वारा भोजन बनाते हैं। इस भोजन पर ही अन्य सभी जीवधारी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से आश्रित रहते हैं।

पौधों का ताप नियंत्रण करने के लिए :- (Control of Temperature in Plants) 
वाष्पोत्सर्जन की क्रिया में पौधों के वायवीय भागों में जलवाष्प होता रहता है। जिसमें पौधों की ऊष्मा प्रयुक्त होती है। इससे पौधों का तापक्रम स्थिर रहता है। और अधिक ताप पर पत्तियां झुलसती नहीं है।

पोषक पदार्थों का स्थानांतरण के लिए :- (Translocation of Nutritive Substances) 

पौधों के हरे भागों में निर्मित भोज्य पदार्थ तथा भूमि से अवशोषित खनिज लवण जल में घुलित अवस्था में ही एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित होते हैं। और विभिन्न क्रियाओं में प्रयुक्त होते हैं।

कोशिकाओं की स्फीति दशा बनाए रखने के लिए :- (Turgidity of Cells) 

जल पादप कोशिकाओं की स्फीति बनाए रखता है जिससे पौधों के विभिन्न भाग तनाव की दशा में रहते है। तथा पौधों की अनेक क्रियाएं-
जैसे:-रन्ध्रों का खुलना, पुष्पों का खिलना आदि सम्पन्न होती है।

पौधों में परागण की क्रिया के लिए (प्रजनन क्रिया) :-(Reproduction)

पौधों में परागण की क्रिया के लिए जल आवश्यक है। इसी प्रकार से मौस तथा फर्न आदि पौधों में निषेचन क्रिया के लिए भी जल आवश्यक होता है।

फलों व बीजों का प्रकीर्णन के लिए :- (Dispersal of Fruits and Seeds)

अनेक पौधों के फलों व बीजों का प्रकीर्णन जल द्वारा होता है।
जैसे:- कमल नारियल आदि

इससे यह ज्ञात होता है कि जल की अनुपस्थिति में पौधा जीवित नहीं रह सकता है। पौधों का भी जीवन और उनका सम्पूर्ण विकास जल पर आधारित है।
पौधों का जल प्रप्ति साधन :- ( Receipt of water recovery )
पौधे अपना संपूर्ण जल मृदा से लेते हैं। विभिन्न प्रकार की मृदा में विभिन्न अवस्था में जल की मात्रा भी भिन्न होती है। सामान्य मृदा में जल लगभग 25% होता है। मिट्टी में जल विशेष रूप से वर्षा द्वारा जाता है।

Categorized in:

Tagged in:

,