वनस्पति जगत का वर्गीकरण (Classification of Plant Kingdom)

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Classification of Plant Kingdom in hindi

वनस्पति जगत का वर्गीकरण  (Classification of Plant Kingdom)

  • वनस्पति विज्ञान का जनक (Father of Botany) थियोफ्रेस्ट्स (Theophrastus) को कहा जाता है। सर्वप्रथम थियोफ्रेस्ट्स ने पौधों को उनके स्वभाव व आकार के आधार पर शाक (Herbs), झाड़ी (Shrubs) तथा वृक्ष (Trees) में विभाजित किया था। इन्होंने अपनी पुस्तक Historia plantarum में 480 पौधों का वर्णन किया है।
  • उसके बाद
  • कैरोलस लिनियस (Carolus Linnaeus)– ने 1737 में अपनी पुस्तक (Genera plantarum) में समस्त पौधों को 24 वर्गों में वर्गीकृत किया। उन्होंने समस्त पुष्प धारी पौधों को 23 वर्गों में विभाजित किया तथा उन सभी पौधों को जिनमें पुष्प नहीं होते 24 में वर्ग Cryptogamia में रखा।
  • इन्होंने पुष्पधारी पौधों (Flowering plants) को पुष्पों में पाए जाने वाले पुंकेसरों (Stamens) की संख्या के आधार पर वर्गीकृत किया और इस प्रकार प्रथम बार पादप वर्गीकरण की लैंगिक प्रणाली (Sexual system) प्रस्तुत की। इस उपलब्धि के कारण
  • कैरोलस लिनियस को आधुनिक वर्गिकी का जनक कहा जाता है।आइकलर (Eichler)- ने 1883 में संपूर्ण वनस्पति जगत को दो प्रमुख भागों में विभाजित किया।

1. क्रिप्टोगेमिया (Cryptogamia)- क्रिप्टोगेमिया में निम्न श्रेणी के पौधों को रखा गया जिसमे पुष्प एवं बीज का निर्माण नहीं होता। 

2. फेनरोगेमिया (Phanerogamia)-फेनरोगेमिया में उच्च श्रेणी के पौधों को रखा गया हैै। जिसमें पुष्प तथा बीज उत्पन्न होते हैं। इस प्रकार क्रिप्टोगेमिया को पुष्प एवं बीज रहित पौधे तथा फेनरोगेमिया को पुष्पधारी अथवा बीजधारी पौधे कहते हैं।

1. क्रिप्टोगेमिया के उपविभाग- A. थैलाफाइटा B. ब्रायोफाइटा C. टेरीडोफाइटा

A. थैलाफाइटा के वर्ग a. शैवाल b. कवकc. जीवाणु d. लाइकेन

B. ब्रायोफाइटा के वर्ग a. लिवरवर्ट्स b. मॉसेस

C. टेरीडोफाइटा के वर्ग a. साइलोप्सिडा b. माइकोप्सिडा c. स्फीनोप्सिडा d. टेरोप्सिडा

2.फेनरोगेमिया के उपविभाग A. जिमनोस्पर्म B. एन्जियोस्पर्म

A. जिमनोस्पर्म के वर्ग – a. साइकेडस b. कोनिफर c. नीटेल्स

B.एन्जियोस्पर्म के वर्ग a. एकबीजपत्री b. द्विबीजपत्री

वर्गीकरण के प्रकार (Types of classification)-वैज्ञानिकों द्वारा आज तक जो भी वर्गीकरण की अनेक पद्धतियां प्रस्तुत की जा चुकी है। वह विभिन्न वैज्ञानिकों द्वारा किए गए वर्गीकरण को निम्न तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है।
1. कृत्रिम पद्धतियां2. प्राकृतिक पद्धतियां 3. जातिवृत्तीय पद्धतियां
1. कृत्रिम पद्धतियां (Artificial Systems)-
इस पद्धति में पौधे के एक या एक से अधिक लक्षणों के आधार पर समूह (Groups) तथा उपसमूह ( Sub-groups)  बनाए जाते हैं। तथा इसके अंतर्गत थियोफ्रेस्ट्स, ब्रून फेल्स एवं कैरोलस लिनियस के वर्गीकरण रखे गए हैं। 

2.प्राकृतिक पद्धतियां (Natural Systems)-प्राकृतिक पद्धति का वर्गीकरण सर्वप्रथम ए डब्ल्यू आइकलर (A W Eichler) ने 1883 में किया था।इस पद्धति में पौधों के वर्गीकरण के लिए पौधों के सभी महत्वपूर्ण लक्षणों को आधार बनाया गया है।पौधों की कायिक संरचना तथा जनन क्रिया में समानता के आधार पर समूह व उपसमूह बनाए जाते है।

3. जातिवृत्तीय पद्धतियां (Phylogenetic Systems)-
जातिवृत्तीय पद्धती में पौधे के विकास Evolution, अनुवांशिक लक्षणों Hereditary characters के संबंधों तथा जनन गुणों Reproductive characters के आधार पर समूह या उप समूह बनाए जाते हैं जोकि पादप जातिवृत की सभी शाखाओं में हुई नवीनतम शोध पर आधारित होते हैं।

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