पादप शरीर – क्रिया विज्ञान | पादप कार्यिकी) (PLANT PHYSIOLOGY)

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पादप शरीर – क्रिया विज्ञान (पादप कार्यिकी) के बारे में                            
सबसे पहले हम ये जान लेते है कि पादप शरीर-क्रिया विज्ञान का अध्य्यन किसने किया? 
Study of Plant Physiology-
पादप शरीर क्रिया विज्ञान का अध्ययन सर्वप्रथम स्टीफन हेल्स (Stephen Hales) ने किया। उन्होंने प्रथम बार अपने भौतिकी व संख्यिकी  के ज्ञान के आधार पर प्रयोगात्मक विधियां ज्ञात की जिनसे पौधों में होने वाले परिवर्तन जैसे पौधों में रसों (Saps) की गति, वाष्पोत्सर्जन दर, पौधों में रसारोहण क्रिया में मूलदाब व केशिका बल को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। और इस अध्य्यन से स्टीफन हेल्स (Stephen Hales) को पादप शरीर क्रिया विज्ञान का जनक भी कहा जाता है।
तो दोस्तों हमे यह पता चल गया कि पादप शरीर क्रिया विज्ञान का अध्ययन किसने किया?
स्टीफन हेल्स (Stephen Hales) ने 

अब हम जानेंगे पादप शरीर क्रिया विज्ञान (पादप कार्यिकी) क्या है?

पादप कार्यिकी(Plant Physiology)

परिचय (Introduction)

पादप शरीर-क्रिया विज्ञान या पादप कार्यिकी वनस्पति विज्ञान की वह शाखा है जिसमें पौधों में विभिन्न प्रकार की जैविक क्रियाओं (Vital Activities) का अध्ययन किया जाता है।यहां पर प्रश्न यह उठता है कि जैविक क्रियाएं (Vital Activities) क्या होती हैै?

  • जैविक क्रियाएं:-  पादप कोशिका में होने वाले सभी रासायनिक एवं भौतिक परिवर्तन (Chemical and physical changes) तथा पादप अथवा पादप कोशिका (Plant Cell) एवं वातावरण (environment) के बीच सभी प्रकार का आदान-प्रदान जो जैविक क्रियाओंं के अन्तर्गत आते है उन्हें जैविक क्रिया कहते हैं।
  • यह क्रियाएंं निम्नलिखित होती है:-  जैसे:- रसायनिक परिवर्तन:-  रसायनिक परिवर्तन के अंतर्गत प्रकाश संश्लेषण, पाचन, श्वसन, प्रोटीन, वसा तथा हॉरमोन्स पदार्थों का संश्लेषण अदि आते हैं।
  • उसके बाद आता है – भौतिक परिवर्तन:- भौतिक परिवर्तन के अंतर्गत  विभिन्न प्रकार की गैसे (CO2) कार्बन डाइऑक्साइड,(O2) ऑक्सीजन, तथा (Osmosis) परासरण, (Transpiration) वाष्पोत्सर्जन, (Ascent of Sap) पौधों में रसारोहण खनिज तत्व एवं जल का अवशोषण आदि।
  • कोशिका वृद्धि और विकास में रासायनिक एवं भौतिक दोनों परिवर्तन होते है।प्रकाश संश्लेषण और श्वसन में वातावरण और कोशिका के बीच ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड का आदान-प्रदान होता है। इसी प्रकार वाष्पोत्सर्जन तथा जल अवशोषण में वातावरण तथा पादप कोशिका के बीच जल के अणुओं का आदान-प्रदान होता है।
  • इस प्रकर हम देखते हैं कि पौधेे के बीज के रूप में से लेकर जन्म से लगातार उसकी वृद्धि विकास प्रजनन जीर्णावस्था अदि तक बहुत सी विभिन्न प्रकार की जटिल क्रियाएं होती हैंं। यह विभिन्न प्रकार के रासायनिक तथा भौतिक परिवर्तन पौधेे की शरीर रचना की इकाई कोशिका के द्वारा ही होतेे हैं। इसलिए कोशिका को पौधेेे की संरचना तथा कार्य की इकाई भी कहा जाता है और इनसे होने वाले विभिन्न परिवर्तन ही कार्यिकी के अंतर्गत आते है।

पादप शरीर क्रिया विज्ञान के अध्ययन का उद्देश्य:- (Study of plant physiology)
पादप शरीर क्रिया विज्ञान के अध्ययन का उद्देश्य निम्न प्रकार है-

  • पादप शरीर में कौन-कौन सी क्रिया प्रतिक्रिया किस प्रकार सेे होती है।
  • प्रत्येक क्रिया का पौधे के जीवन के लिए क्या महत्व है।
  • प्रत्येक क्रिया पर कौन से बाह्य तथा अंत:कारक प्रभाव डालते हैं और यह प्रभाव किस प्रकार का होता है?

स्टीफन हेल्स ने पौधे की वृद्धि और विकास का पूर्ण रूप से नियंत्रण इस प्रकार किया:-

  • प्रकाशकालिता:-  प्रकाशकालिता की खोज से अनेक पौधों में उनका वांछित दीप्तिकाल घटा या बढ़ाकर तथा निम्न ताप उपचार द्वारा असामयिक पुष्पन तथा शीत प्रजातियों को सामान्य वातावरण में फलने-फूलने को प्रेरित किया जाता है। पादप शरीर-क्रिया विज्ञान के अनुसंधान से कुछ क्रियाएं जैसे प्रकाशीय श्वसन को कम करके पौधों की प्रकाश संश्लेषण की क्षमता बढ़ाई जा सकती है।
  • ऊतक संवर्धन:- ऊतक संवर्धन तकनीक से पादप शरीर क्रिया में वैज्ञानिकों ने कम समय में ऐसे पौधे तैयार किए हैं जो सामान्य रूप से प्रजनन द्वारा प्राप्त नहीं किया जा सकता और इनका उपयोग व्यापक स्तर पर किया जा रहा है। 
  • विभिन्न पादप हार्मोन जैसे- ऑक्सिन, जिबरेलिन, आदि।
  • इन सभी तथ्यों के आधार पर यह कहना गलत नहीं होगा कि कृषि जगत में हरित क्रांति की सफलता पादप कार्यिकी के ज्ञान व नवीन खोजो के कारण ही संभव हो पाई है।

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