प्रागैतिहासिक काल से ही मानव शैवालों का विभिन्न रूपों में प्रयोग करता रहा है। मानव के बौद्धिक विकास एवं असीमित एवं अनंत आवश्यकताओं के कारण शैवालों के महत्त्व में भी वृद्धि हुई।

शैवालों के लाभप्रद उपयोग:-
शोधों के आधार पर यह स्पष्ट किया गया है कि शैवाल भोजन, औषधि, कृषि, एवं उद्योगों आदि क्षेत्रों में अत्यंत उपयोगी है।  

1. भोजन के रूप में :- शैवाल की अनेक जातियाँ भोजन के रूप में प्रयोग की जाती है। इनमें कार्बोहाइड्रेट अकार्बनिक यौगिकों एवं विटामिन की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। शैवाल में विटामिन A, C, D एवं E पायी जाती हैं। शैवालों का भोजन के रूप में प्रयोग विश्व में सर्वाधिक जापान में होता है। आयरलैंड में शैवाल कान्ड्र्स -क्रिस्पस को सुखाकर खाया जाता है। एलेरिया-एस्कलेण्टा शैवाल को आइसलैण्ड, आयर लैण्ड तथा डेनमार्क में स्वादिष्ट माना जाता है। नास्टाक कम्यून को चीन में खाया जाता है। 

2. चारे के रूप :-  नॉर्वे, फ्रांस, डेनमार्क, अमेरिका था न्यूजीलैंड आदि देशों में समुद्री शैवालों का चारे के रूप में प्रयोग किया जाता है। बहुत सी मछलियां लिन्जबया शैवालों पर आश्रित रहती हैं। अन्य देशों में कुछ लाल शैवालों को भेड़ो तथा मुर्गियों के लिए भोजन के रूप में प्रयोग किया जाता है। लैमिनेरिया तथा फ्यूकस शैवालों को गाय तथा बैलों आदि को खिलाया जाता हैं। चीन में सारगासम को चारे के रूप में मान्यता दी गई है। 

3. उद्योगों में उपयोग:-  शैवालों का उद्योग के क्षेत्र में अधिक महत्व है। इनसे निम्न उत्पादों को वाणिज्यिक स्तर पर प्राप्त किया जाता है। 
जैसे:-

अगर अगर:- यह एक जैली सदृश्य जटिल पाली -सेकेराइड हैं। जो कुछ विशेष लाल शैवालों से प्राप्त किया जाता है। इनके मुख्य स्रोत ग्रेसिलेरिया, जेलिडियम क्रांड्र्स तथा फिलोफोरा आदि वंश है। अगर अगर लाल शैवालो की कोशा- भित्तियों में सेलुलोस के साथ पाया जाता है। वर्ष 1939 तक जापान अगर-अगर का सबसे बड़ा उत्पादक देश था। यह एक जिलेटिनी पदार्थ है इसमें स्वच्छ नाइट्रोजन होता है। इसका गलनांक 90° – 100°F के मध्य होता है। 
निष्कर्षण:- शैवालों का निष्कर्षण पानी में उबालकर किया जाता है। कम तापमान पर अगर अगर ओस में परिवर्तित हो जाता है। 
उपयोग:-
1. प्रसाधन, कपड़ा उद्योगों में स्थाईकारक के रूप मे।
2. औषधि एवं चमड़ा उद्योग में। आदि

कैरागीनिन:- इनका मुख्य स्रोत लाल शैवाल कॉराड्रस, कंड्रर्स है। यह इन 
शैवालों की कोशा- भित्तियों में पाये जाने वाले पालीसैकेराइड है। 

उपयोग:- 
1. भोजन, कपड़ा, उद्योग में।
2. खांसी के इलाज में।3. पेंट उद्योग में।  

4. कृषि में उपयोग:-  जैसा की हम सब जानते हैं कि  बैक्टेरिया, कवक शैवाल तथा दूसरे अन्य सूक्ष्म जीवाणु पाये जाते हैं। इनमे पाये जाने वाले में नील हरित शैवाल सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। इनमें नाइट्रोजन यौगिकीकरण की क्षमता होती है। यह यौगिक मृदा की क्षमता एवं पौधों की वृद्धि को बढ़ाते हैं। 

5. औषधि के रूप में उपयोग:- एक कोशीय हरित शैवाल क्लोरेला एक एंटीबायोटिक का संश्लेषण करता है जिसे क्लोरेलिन कहते हैं। कारा एवं नाइटेला जल कुंड में उपस्थित मच्छरों को नष्ट कर देते हैं यह मच्छरों की रोकथाम में उपयोगी हैं।

6. भूमि सुधार में प्रयोग:-   वर्षा ऋतु में नास्टाक साइटोनीमा एवं एनाबिना आदि ऊसर भूमि पर की सतह पर वृद्धि करते हैं। इन शैवालों के कारण भूमि का pH 9.7 से 7.6 हो जाता है। तथा इसकी जल रोक सकने की क्षमता 40% बढ़ जाती है। और नाइट्रोजन की मात्रा में 30% से 38% तक वृद्धि होती है।

7. जैविक शोध में:-  पौधों में प्रकाश संश्लेषण एवं दूसरी जैविक क्रियाओं पर एक -कोशीय क्लोरेला का अध्ययन है। इसका कारण है कि इन पर किए गए प्रयोग आसानी से किया जा सकते हैं इसके अतिरिक्त 
 इनके वृद्धि की गति उच्च पौधों की अपेक्षा अधिक होती है।

8. हानिकारक शैवाल:-  हरित शैवाल सेफेल्यूरोस कुछ आवर्त बीजी पौधों की पत्तियों पर पाया जाने वाला परजीवी है। इसकी एक जाति सी. वाइरेसेन्स आम की पत्तियों पर परजीवी के रूप में पाई जाती है। इसके अतिरिक्त यह चाय में लाल रस्ट भी पैदा करता है।

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