क्या है केरल में फैल रहा निपाह वायरस?

हाल ही में केरल ने राज्य में फ्रूट बैट (Fruit Bat)/(एक प्रकार का चमगादड़) की पहचान घातक निपाह वायरस के वाहक के रूप में पुष्टि की है।

निपाह वायरस

  • निपाह, एक खतरनाक वायरल संक्रमण है।
  • निपाह वायरस एक जूनोटिक वायरस या पशुजन्यरोग है।
  • जूनोटिक वायरस, यह जानवरों से इंसानों में फैलता है
  • निपाह वायरस का मुख्य लक्षण बुखार, खांसी, सिरदर्द, दिमाग में सूजन, उल्टी होना, साँस लेने में तकलीफ होना आदि हैं।
  • यह वायरस इंसानों के साथ-साथ जानवरों को भी अपनी चपेट में ले लेता है। यह आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुँच जाता है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, निपाह वायरस एक नई उभरती बीमारी है। इसे ‘निपाह वायरस एन्सेफलाइटिस’ भी कहा जाता है।
  • निपाह वायरस एक तरह का दिमागी बुखार(एन्सेफलाइटिस) है। इसका संक्रमण तेज़ी से होता है।
  • यह संक्रमण होने के 48 घंटे के भीतर व्यक्ति को कोमा में पहुँचा देता है।
  • इसका कोई उपचार नहीं है और अब तक ही इसका कोई टीका उपलब्ध नहीं है।
  • वर्ष 1998-99 में पहली बार मलेशिया में कम्पुंग सुंगई निपाह में वायरस की खोज की गई थी। इसलिए इसे निपाह वायरस कहा गया।
  • यह पहली बार घरेलू सुअरों में देखा गया और कुत्तों, बिल्लियों, बकरियों, घोड़ों तथा भेड़ों सहित घरेलू जानवरों की कई प्रजातियों में पाया गया।
  • भारत में इसका पहला मामला वर्ष 2001 में सिलीगुड़ी(पश्चिम बंगाल) में सामने आया था।
  • भारत में इसका दूसरा मामला वर्ष 2002 में पश्चिम बंगाल के नदिया जिला में सामने आया था।
  • वायरस के प्राकृतिक वाहक फ्रूटबैट होते हैं, जो व्यापक रूप से दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में पाए जाते हैं।
  • निपाह वायरस हेंड्रा वायरस से संबंधित है
  • हेंड्रा वायरस संक्रमण एक दुर्लभ उभरता हुआ ज़ूनोसिस है जो संक्रमित घोड़ों और मनुष्यों दोनों में गंभीर और अक्सर घातक बीमारी का कारण बनता है।
  • खजूर के खेती करने वालो में वायरस के फैलने के आशंका सबसे अधिक होती है
  • भारतीय विषाणु विज्ञान संस्थान के अनुसार, इस वायरस का संक्रमण सर्वप्रथम टेरोपस प्रजाति के रूप में चिह्नित फ्रूट बैट से हुआ था।
  • बांग्लादेश में इसके प्रकोप के दौरान शोधकर्त्ताओं ने इंडियन फ्लाइंग फॉक्स में निपाह के रोगप्रतिकारकों का पता लगाया था।

‘फ्रूट बैट’

  • ‘फ्रूट बैट’ कीटभक्षी चमगादड़ से अलग होते हैं। आहार के लिये ये फलों पर निर्भर रहते हैं।
  • फलों का पता लगाने के लिये ये सूँघने की क्षमता का उपयोग करते हैं, जबकि कीटभक्षी चमगादड़ प्रतिध्वनि की सहायता से अपने शिकार का पता लगाते हैं।
  • ‘फ्रूट बैट’ टेरोपोडीडेई परिवार से संबंधित हैं जो निपाह वायरस के लिये प्राकृतिक वाहक है।
  • ‘फ्रूट बैट’ दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में बड़े पैमाने पर पाए जाते हैं और इन्हें फ्लाइंग फॉक्स (Flying Fox) भी कहा जाता है।
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