कांग्रेस का कलकत्ता अधिवेशन

Calcutta Convention of Congress – 1906 ई०

कुछ सबसे महत्वपूर्ण तथ्य जो हर बार परीक्षाओं में पूछे जाते हैं –

  • कांग्रेस का कलकत्ता अधिवेशन 1906 ई. में कलकत्ता में सम्पन्न हुआ।
  • उग्रवादी बाल गंगाधर तिलक को अध्यक्ष बनाना चाहते थे जबकि उदारवादियों ने दादा भाई नौरोजी को अध्यक्ष बना दिया।
  • इस अधिवेशन की प्रमुख बात ये थी कि इस अधिवेशन में नरम दल तथा गरम दल के बीच जो मतभेद थे, वह उभरकर सामने आ गये।
  • दादा भाई नौरोजी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में पहली बार कांग्रेस के मंच से कहा कि “स्वराज हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है” तथा इसे हासिल करना ही कांग्रेस का लक्ष्य है।
  • यद्यपि यहाँ ‘स्वराज‘ शब्द से उनका तात्पर्य ऑस्ट्रेलिया एवं कनाडा के ब्रिटिश उपनिवेशों की तर्ज पर ब्रिटिश प्रभुसत्ता के अंदर ‘स्वशासन’ (Dominion Status) से था।
  • इस स्थिति में उदारवादीयों ने दादाभाई नौरोजी को इंग्लैण्ड से वापस बुला कर कांग्रेस के ‘कलकत्ता अधिवेशन‘ का अध्यक्ष बना दिया।
  • उग्रवादी दल इस अधिवेशन में चार प्रस्तावों को पास करवाने में सफल रहा- स्वराज्य की प्राप्ति राष्ट्रीय शिक्षा को अपनाना स्वदेशी आन्दोलन को प्रोत्साहन देना विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार करना